का संभरण प्रतीत होता था। कारागृह में कई लोग उस पत्र को लेकर पुनः-पुनः पढ़ते। इसके लिए मैंने
निश्चय किया था, मेरे पत्र की अवधि पूरी होने से पत्र-प्रप्ति के पश्चात् ही हड़ताल में सम्मिलित हो जाऊंगा। मेरे बंधु इससे पूर्व ही हड़ताल में सम्मिलित हो चुके थे। जैसे-जैसे हड़ताल की अवधि लंबी होती गई, वैसे-वैसे बारी को ऐसे अपमान का अनुभव करना पड़ा, जिसे उसने कभी नहीं किया था। अन्रू बंदियों की दृष्टि में भी परिवर्तन आ गया। साधारण बंदियों पर जो दबदबा उन्होंने बनाया हुआ था,
का संभरण प्रतीत होता था। कारागृह में कई लोग उस पत्र को लेकर पुनः-पुनः पढ़ते। इसके लिए मैंने
निश्चय किया था, मेरे पत्र की अवधि पूरी होने से पत्र-प्रप्ति के पश्चात् ही हड़ताल में सम्मिलित हो जाऊंगा। मेरे बंधु इससे पूर्व ही हड़ताल में सम्मिलित हो चुके थे। जैसे-जैसे हड़ताल की अवधि लंबी होती गई, वैसे-वैसे बारी को ऐसे अपमान का अनुभव करना पड़ा, जिसे उसने कभी नहीं किया था। अन्रू बंदियों की दृष्टि में भी परिवर्तन आ गया। साधारण बंदियों पर जो दबदबा उन्होंने बनाया हुआ था,