युद्व के समय हो गई थी और इस बेतार की आवाज पड़ोस अथवा पिछवाड़े की एक-दो कोठरियों तक ही पहुंचती थी। वहां ‘कैपिटल’ का दावा था कि वह ‘कैपिटल’ का दावा था कि वह ठेठ जर्मनी तक पहुंचती थी। केवल दूरी का अंतर, जो क्षम्य था। वैसे भी दार्शनिकों के सामने अभी तक यह समस्या ही है कि ैचंबम वत जपउम (दिक् और काल) ये पदार्थ हैं या आभास मात्र!
इस तार यंत्र द्वारा हमें एक-दूसरे की योजना का ज्ञान होता और जो करना है, सभी एक साथ करते। ‘बारी’
युद्व के समय हो गई थी और इस बेतार की आवाज पड़ोस अथवा पिछवाड़े की एक-दो कोठरियों तक ही पहुंचती थी। वहां ‘कैपिटल’ का दावा था कि वह ‘कैपिटल’ का दावा था कि वह ठेठ जर्मनी तक पहुंचती थी। केवल दूरी का अंतर, जो क्षम्य था। वैसे भी दार्शनिकों के सामने अभी तक यह समस्या ही है कि ैचंबम वत जपउम (दिक् और काल) ये पदार्थ हैं या आभास मात्र!
इस तार यंत्र द्वारा हमें एक-दूसरे की योजना का ज्ञान होता और जो करना है, सभी एक साथ करते। ‘बारी’