रमा ने भिक्षुकों की भांति गिड़गिडाकर कहा, 'तुम मेरा कोई उज्र न सुनोगी?'
जालपा ने अभिमान से कहा,'नहीं!'
'तो मैं मुंह में कालिख लगाकर कहीं निकल जाऊं?''
'तुम्हारी ख़ुशी!'
'तुम मुझे क्षमा न करोगी?'
'कभी नहीं, किसी तरह नहीं!'
रमा एक क्षण सिर झुकाए खडा रहा, तब धीरे-धीरे बरामदे के नीचे जाकर जग्गो से बोला, '
दादी, दादा आएं तो कह देना, मुझसे ज़रा देर मिल लें। जहां कहें, आ जाऊं?'
जग्गो ने कुछ पिघलकर कहा, 'कल यहीं चले आना।'
रमा ने भिक्षुकों की भांति गिड़गिडाकर कहा, 'तुम मेरा कोई उज्र न सुनोगी?'
जालपा ने अभिमान से कहा,'नहीं!'
'तो मैं मुंह में कालिख लगाकर कहीं निकल जाऊं?''
'तुम्हारी ख़ुशी!'
'तुम मुझे क्षमा न करोगी?'
'कभी नहीं, किसी तरह नहीं!'
रमा एक क्षण सिर झुकाए खडा रहा, तब धीरे-धीरे बरामदे के नीचे जाकर जग्गो से बोला, '
दादी, दादा आएं तो कह देना, मुझसे ज़रा देर मिल लें। जहां कहें, आ जाऊं?'
जग्गो ने कुछ पिघलकर कहा, 'कल यहीं चले आना।'