रमा ने मोटर पर बैठते हुए कहा, 'यहां अब न आऊंगा, दादी!'
मोटर चली गई तो जालपा ने कुत्सित भाव से कहा, 'मोटर दिखाने आए थे, जैसे
ख़रीद ही तो लाए हों!'
जग्गो ने भर्त्सना की, 'तुम्हें इतना बेलगाम न होना चाहिए था, बहू! दिल पर चोट लगती है, तो आदमी को कुछ नहीं सूझता।'
जालपा ने निष्ठुरता से कहा, 'ऐसे हयादार नहीं हैं, दादी! इसी सुख के लिए तो आत्मा बेचीब उनसे यह सुख भला क्या छोडा जायगा। पूछा नहीं, दादा से मिलकर क्या करोगे?
रमा ने मोटर पर बैठते हुए कहा, 'यहां अब न आऊंगा, दादी!'
मोटर चली गई तो जालपा ने कुत्सित भाव से कहा, 'मोटर दिखाने आए थे, जैसे
ख़रीद ही तो लाए हों!'
जग्गो ने भर्त्सना की, 'तुम्हें इतना बेलगाम न होना चाहिए था, बहू! दिल पर चोट लगती है, तो आदमी को कुछ नहीं सूझता।'
जालपा ने निष्ठुरता से कहा, 'ऐसे हयादार नहीं हैं, दादी! इसी सुख के लिए तो आत्मा बेचीब उनसे यह सुख भला क्या छोडा जायगा। पूछा नहीं, दादा से मिलकर क्या करोगे?