वह होते तो ऐसी फटकार सुनाते कि छठी का दूध याद आ जाता।'
जग्गो ने तिरस्कार के भाव से कहा, 'तुम्हारी जगह मैं होती तो मेरे मुंह से ऐसी बातें न निकलतीं। तुम्हारा हिया बडा कठोर है। दूसरा मर्द होता तो इस तरह चुपका-चुपका सुनता- मैं तो थर-थर कांप रही थी कि कहीं तुम्हारे ऊपर हाथ न चला दे, मगर है बडा गमखोर।'
जालपा ने उसी निष्ठुरता से कहा, 'इसे गमखोरी नहीं कहते दादी, यह बेहयाई है।'
देवीदीन ने आकर कहा, 'क्या यहां भैया आए थे? मुझे मोटर पर रास्ते में दिखाई दिए थे।'
वह होते तो ऐसी फटकार सुनाते कि छठी का दूध याद आ जाता।'
जग्गो ने तिरस्कार के भाव से कहा, 'तुम्हारी जगह मैं होती तो मेरे मुंह से ऐसी बातें न निकलतीं। तुम्हारा हिया बडा कठोर है। दूसरा मर्द होता तो इस तरह चुपका-चुपका सुनता- मैं तो थर-थर कांप रही थी कि कहीं तुम्हारे ऊपर हाथ न चला दे, मगर है बडा गमखोर।'
जालपा ने उसी निष्ठुरता से कहा, 'इसे गमखोरी नहीं कहते दादी, यह बेहयाई है।'
देवीदीन ने आकर कहा, 'क्या यहां भैया आए थे? मुझे मोटर पर रास्ते में दिखाई दिए थे।'