सब पूछ आया। हाबडे में घर है। पता-ठिकाना सब मालूम हो गया।'
जालपा ने डरते-डरते कहा, 'इस वक्त चलोगे या कल किसी वक्त?'
देवीदीन-'तुम्हारी जैसी मरजीब जी जाहे इसी बखत चलो, मैं तैयार हूं।
जालपा-'थक गए होगे?'
देवीदीन-'इन कामों में थकान नहीं होती बेटी।'
आठ बज गए थे। सड़क पर मोटरों का तांता बंध हुआ था। सड़क की दोनों पटरियों पर हज़ारों स्त्री-पुरूष बने-ठने, हंसते-बोलते चले जाते थे। जालपा ने सोचा, दुनिया कैसी अपने राग-रंग में मस्त है। जिसे उसके लिए मरना हो मरे,
सब पूछ आया। हाबडे में घर है। पता-ठिकाना सब मालूम हो गया।'
जालपा ने डरते-डरते कहा, 'इस वक्त चलोगे या कल किसी वक्त?'
देवीदीन-'तुम्हारी जैसी मरजीब जी जाहे इसी बखत चलो, मैं तैयार हूं।
जालपा-'थक गए होगे?'
देवीदीन-'इन कामों में थकान नहीं होती बेटी।'
आठ बज गए थे। सड़क पर मोटरों का तांता बंध हुआ था। सड़क की दोनों पटरियों पर हज़ारों स्त्री-पुरूष बने-ठने, हंसते-बोलते चले जाते थे। जालपा ने सोचा, दुनिया कैसी अपने राग-रंग में मस्त है। जिसे उसके लिए मरना हो मरे,