हमें सख्ती करनी पड़ेगी। जेल को आसान न समझिएगा। ख़ुदा दोज़ख में ले जाए, पर जेल की सज़ा न दे। मार-धाड़, गाली-गुतरि वह तो वहां की मामूली सज़ा है। चक्की में जोत दिया तो मौत ही आ गई। हलफ से कहता हूं, दोज़ख से बदतर है जेल! '
दारोग़ा -'यह बेचारे अपनी बेगम साहब से माज़ूर हैं ब वह शायद इनके जान की गाहक हो रही हैं। उनसे इनकी कोर दबती है ।'
इंस्पेक्टर, 'क्या हुआ, कल तो वह हार दिया था न? फिर भी राज़ी नहीं हुई ?'
रमा ने कोट की जेब से हार निकालकर मेज़ पर रख दिया और बोला,
हमें सख्ती करनी पड़ेगी। जेल को आसान न समझिएगा। ख़ुदा दोज़ख में ले जाए, पर जेल की सज़ा न दे। मार-धाड़, गाली-गुतरि वह तो वहां की मामूली सज़ा है। चक्की में जोत दिया तो मौत ही आ गई। हलफ से कहता हूं, दोज़ख से बदतर है जेल! '
दारोग़ा -'यह बेचारे अपनी बेगम साहब से माज़ूर हैं ब वह शायद इनके जान की गाहक हो रही हैं। उनसे इनकी कोर दबती है ।'
इंस्पेक्टर, 'क्या हुआ, कल तो वह हार दिया था न? फिर भी राज़ी नहीं हुई ?'
रमा ने कोट की जेब से हार निकालकर मेज़ पर रख दिया और बोला,