वह हार यह रक्खा हुआ है।
इंस्पेक्टर-- 'अच्छा, इसे उन्होंने नहीं कबूल किया।'
डिप्टी-'कोई प्राउड लेडी है ।'
इंस्पेक्टर-'कुछ उनकी भी मिज़ाज़-पुरसी करने की जरूरत होगी ।'
दारोग़ा -'यह तो बाबू साहब के रंग-ढंग और सलीके पर मुनहसर है। अगर आप ख्वामख्वाह हमें मज़बूर न करेंगे, तो हम आपके पीछे न पडेंगे ।'
डिप्टी-'उस खटिक से भी मुचलका ले लेना चाहिए ।'
रमानाथ के सामने एक नई समस्या आ खड़ी हुई, पहली से कहीं जटिल, कहीं भीषण। संभव था,
वह हार यह रक्खा हुआ है।
इंस्पेक्टर-- 'अच्छा, इसे उन्होंने नहीं कबूल किया।'
डिप्टी-'कोई प्राउड लेडी है ।'
इंस्पेक्टर-'कुछ उनकी भी मिज़ाज़-पुरसी करने की जरूरत होगी ।'
दारोग़ा -'यह तो बाबू साहब के रंग-ढंग और सलीके पर मुनहसर है। अगर आप ख्वामख्वाह हमें मज़बूर न करेंगे, तो हम आपके पीछे न पडेंगे ।'
डिप्टी-'उस खटिक से भी मुचलका ले लेना चाहिए ।'
रमानाथ के सामने एक नई समस्या आ खड़ी हुई, पहली से कहीं जटिल, कहीं भीषण। संभव था,