जालपा ने कहा, 'लाश होगी और क्या! '
रमानाथ-- 'शायद अभी जान हो'
जालपा--'अच्छा, तो ज़ोहरा तो तैर भी लेती है। जभी हिम्मत हुई। '
रमा ने ज़ोहरा की ओर चिंतित आंखों से देखते हुए कहा, हां, कुछ-कुछ जानती तो हैं। ईश्वर करे लौट आएं। मुझे अपनी कायरता पर लज्जा आ रही है।
जालपा ने बेहयाई से कहा,'इसमें लज्जा की कौन?सी बात है। मरी लाश के लिए जान को जोखिम में डालने से फायदा, जीती होती, तो मैं ख़ुद तुमसे कहती, जाकर निकाल लाओ।'
जालपा ने कहा, 'लाश होगी और क्या! '
रमानाथ-- 'शायद अभी जान हो'
जालपा--'अच्छा, तो ज़ोहरा तो तैर भी लेती है। जभी हिम्मत हुई। '
रमा ने ज़ोहरा की ओर चिंतित आंखों से देखते हुए कहा, हां, कुछ-कुछ जानती तो हैं। ईश्वर करे लौट आएं। मुझे अपनी कायरता पर लज्जा आ रही है।
जालपा ने बेहयाई से कहा,'इसमें लज्जा की कौन?सी बात है। मरी लाश के लिए जान को जोखिम में डालने से फायदा, जीती होती, तो मैं ख़ुद तुमसे कहती, जाकर निकाल लाओ।'