तो मैं रूपये दे देती। जब वह दोपहर तक नहीं आए और मैं खोजती हुई दफ्तर गई, तब मुझे मालूम हुआ, कुछ नोट खो गए हैं। उसी वक्त जाकर मैंने रूपये जमा कर दिए।'
रतन-'मैं तो समझती हूं, किसी से आंखें लड़ गई। दस-पांच दिन में आप पता लग जायगा। यह बात सच न निकले, तो जो कहो दूं।'
जालपा ने हकबकाकर पूछा, 'क्या तुमने कुछ सुना है?'
रतन-'नहीं, सुना तो नहींऋ पर मेरा अनुमान है।'
जालपा-'नहीं रतन-' मैं इस पर ज़रा भी विश्वास नहीं करती। यह बुराई उनमें नहीं है,
तो मैं रूपये दे देती। जब वह दोपहर तक नहीं आए और मैं खोजती हुई दफ्तर गई, तब मुझे मालूम हुआ, कुछ नोट खो गए हैं। उसी वक्त जाकर मैंने रूपये जमा कर दिए।'
रतन-'मैं तो समझती हूं, किसी से आंखें लड़ गई। दस-पांच दिन में आप पता लग जायगा। यह बात सच न निकले, तो जो कहो दूं।'
जालपा ने हकबकाकर पूछा, 'क्या तुमने कुछ सुना है?'
रतन-'नहीं, सुना तो नहींऋ पर मेरा अनुमान है।'
जालपा-'नहीं रतन-' मैं इस पर ज़रा भी विश्वास नहीं करती। यह बुराई उनमें नहीं है,