और चाहे जितनी बुराइयां हों। मुझे उन पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है।'
रतन ने हंसकर कहा,'इस कला में ये लोग निपुण होते हैं। तुम बेचारी क्या जानो!'
जालपा दृढ़ता से बोली, 'अगर वह इस कला में निपुण होते हैं, तो हम भी ह्रदय को परखने में कम निपुण नहीं होतीं। मैं इसे नहीं मान सकती। अगर वह मेरे स्वामी थे, तो मैं भी उनकी स्वामिनी थी।'
रतन-'अच्छा चलो, कहीं घूमने चलती हो? चलो, तुम्हें कहीं घुमा लावें।'
जालपा-'नहीं, इस वक्त
और चाहे जितनी बुराइयां हों। मुझे उन पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है।'
रतन ने हंसकर कहा,'इस कला में ये लोग निपुण होते हैं। तुम बेचारी क्या जानो!'
जालपा दृढ़ता से बोली, 'अगर वह इस कला में निपुण होते हैं, तो हम भी ह्रदय को परखने में कम निपुण नहीं होतीं। मैं इसे नहीं मान सकती। अगर वह मेरे स्वामी थे, तो मैं भी उनकी स्वामिनी थी।'
रतन-'अच्छा चलो, कहीं घूमने चलती हो? चलो, तुम्हें कहीं घुमा लावें।'
जालपा-'नहीं, इस वक्त