'जब तक यहां कोई ठिकाना न लग जाय, क्या पत्र लिखूं।'
'अरे भले आदमी, इतना तो लिख दो कि मैं यहां कुशल से हूं। घर से भाग आए थे, उन लोगों को कितनी चिंता हो रही होगी! मां-बाप तो हैं न?'
'हां, हैं तो।'
देवीदीन ने गिड़गिडाकर कहा,'तो भैया, आज ही चिट्ठी डाल दो, मेरी बात मानो।'
रमा ने अब तक अपना हाल छिपाया था। उसके मन में कितनी ही बार इच्छा हुई कि देवीदीन से कह दूं, पर बात होंठों तक आकर रूक जाती थी। वह देवीदीन के मुंह
'जब तक यहां कोई ठिकाना न लग जाय, क्या पत्र लिखूं।'
'अरे भले आदमी, इतना तो लिख दो कि मैं यहां कुशल से हूं। घर से भाग आए थे, उन लोगों को कितनी चिंता हो रही होगी! मां-बाप तो हैं न?'
'हां, हैं तो।'
देवीदीन ने गिड़गिडाकर कहा,'तो भैया, आज ही चिट्ठी डाल दो, मेरी बात मानो।'
रमा ने अब तक अपना हाल छिपाया था। उसके मन में कितनी ही बार इच्छा हुई कि देवीदीन से कह दूं, पर बात होंठों तक आकर रूक जाती थी। वह देवीदीन के मुंह