गबन - Gaban

से आलोचना सुनना चाहता था। वह जानना चाहता था कि यह क्या सलाह देता है। इस समय देवीदीन के सद्भाव ने उसे पराभूत कर दिया।

बोला, 'मैं घर से भाग आया हूं, दादा!'

देवीदीन ने मूंछों में मुस्कराकर कहा,'यह तो मैं जानता हूं, क्या बाप से लडाई हो गई?'

'नहीं!'

'मां ने कुछ कहा होगा?'

यह भी नहीं!'

'तो फिर घरवाली से ठन गई होगी। वह कहती होगी, मैं अलग रहूंगी, तुम कहते होगे मैं अपने मां-बाप से अलग न रहूंगा। या गहने के लिए ज़िद करती होगी। नाक में दम कर दिया होगा। क्यों?'


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से आलोचना सुनना चाहता था। वह जानना चाहता था कि यह क्या सलाह देता है। इस समय देवीदीन के सद्भाव ने उसे पराभूत कर दिया।

बोला, 'मैं घर से भाग आया हूं, दादा!'

देवीदीन ने मूंछों में मुस्कराकर कहा,'यह तो मैं जानता हूं, क्या बाप से लडाई हो गई?'

'नहीं!'

'मां ने कुछ कहा होगा?'

यह भी नहीं!'

'तो फिर घरवाली से ठन गई होगी। वह कहती होगी, मैं अलग रहूंगी, तुम कहते होगे मैं अपने मां-बाप से अलग न रहूंगा। या गहने के लिए ज़िद करती होगी। नाक में दम कर दिया होगा। क्यों?'


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