से वह इतना भयभीत था कि उनमें फिसलकर डूब जाने के भय से चंचल मन को उधर भटकने भी न देता था, उसी अथाह और अछोर कल्पना-सागर में वह आज स्वच्छंद रूप से क्रीडाकरने लगा। उसे अब एक नौका मिल गई थी। वह त्रिवेणी की सैर, वह अल्प्रेड पार्क की बहार, वह ख़ुसरो बाग़ का आनंद, वह मित्रों के जलसे, सब याद आ-आकर ह्रदय को गुदगुदाने लगे। रमेश उसे देखते ही गले लिपट जाएंगे। मित्रगण पूछेंगे, कहां गए थे, यार- ख़ूब सैर की? रतन उसकी ख़बर पाते ही दौड़ी आएगी और पूछेगी,
से वह इतना भयभीत था कि उनमें फिसलकर डूब जाने के भय से चंचल मन को उधर भटकने भी न देता था, उसी अथाह और अछोर कल्पना-सागर में वह आज स्वच्छंद रूप से क्रीडाकरने लगा। उसे अब एक नौका मिल गई थी। वह त्रिवेणी की सैर, वह अल्प्रेड पार्क की बहार, वह ख़ुसरो बाग़ का आनंद, वह मित्रों के जलसे, सब याद आ-आकर ह्रदय को गुदगुदाने लगे। रमेश उसे देखते ही गले लिपट जाएंगे। मित्रगण पूछेंगे, कहां गए थे, यार- ख़ूब सैर की? रतन उसकी ख़बर पाते ही दौड़ी आएगी और पूछेगी,