जवाब दिया, 'वसीयत तो नहीं लिखी, और क्या जरूरत थी?'
मणिभूषण ने फिर पूछा, 'शायद कहीं लिखकर रख गए हों?'
रतन-'मुझे तो कुछ मालूम नहीं। कभी ज़िक्र नहीं किया।'
मणिभूषण ने मन में प्रसन्न होकर कहा,मेरी इच्छा है कि उनकी कोई यादगार बनवा दी जाय।
रतन ने उत्सुकता से कहा, 'हां-हां, मैं भी चाहती हूं।'
मणिभूषण-'गांव की आमदनी कोई तीन हज़ार साल की है, यह आपको मालूम है। इतना ही उनका वार्षिक दान होता था। मैंने उनके हिसाब की किताब
जवाब दिया, 'वसीयत तो नहीं लिखी, और क्या जरूरत थी?'
मणिभूषण ने फिर पूछा, 'शायद कहीं लिखकर रख गए हों?'
रतन-'मुझे तो कुछ मालूम नहीं। कभी ज़िक्र नहीं किया।'
मणिभूषण ने मन में प्रसन्न होकर कहा,मेरी इच्छा है कि उनकी कोई यादगार बनवा दी जाय।
रतन ने उत्सुकता से कहा, 'हां-हां, मैं भी चाहती हूं।'
मणिभूषण-'गांव की आमदनी कोई तीन हज़ार साल की है, यह आपको मालूम है। इतना ही उनका वार्षिक दान होता था। मैंने उनके हिसाब की किताब