गबन - Gaban

जितना महीन कहिए उतना महीन पीस दूं,बहूजी। पिसाई अच्छी मिलनी चाहिए।

जालपा-'मोले सेर।'

रतन-'मोले सेर सही।'

जालपा-'मुंह धो आओ। धोले सेर मिलेंगे।'

रतन-'मैं यह सब पीसकर उठूंगी। तुम यहां क्यों खड़ी हो?'

जालपा-'आ जाऊं, मैं भी खिंचा दूं।'

रतन-'जी चाहता है, कोई जांत का गीत गाऊं!'

जालपा-'अकेले कैसे गाओगी! (जागेश्वरी से) अम्मां आप ज़रा दादाजी के पास बैठ जायं, मैं अभी आती हूं।'

जालपा भी जांत पर जा बैठी और दोनों जांत का यह गीत गाने लगीं।


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जितना महीन कहिए उतना महीन पीस दूं,बहूजी। पिसाई अच्छी मिलनी चाहिए।

जालपा-'मोले सेर।'

रतन-'मोले सेर सही।'

जालपा-'मुंह धो आओ। धोले सेर मिलेंगे।'

रतन-'मैं यह सब पीसकर उठूंगी। तुम यहां क्यों खड़ी हो?'

जालपा-'आ जाऊं, मैं भी खिंचा दूं।'

रतन-'जी चाहता है, कोई जांत का गीत गाऊं!'

जालपा-'अकेले कैसे गाओगी! (जागेश्वरी से) अम्मां आप ज़रा दादाजी के पास बैठ जायं, मैं अभी आती हूं।'

जालपा भी जांत पर जा बैठी और दोनों जांत का यह गीत गाने लगीं।


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