गबन - Gaban



देवीदीन को यहां बैठे एक घंटा भी न हुआ था कि सहसा जग्गो आ खड़ी हुई। देवीदीन को द्वार पर बैठे देखकर बोली, 'तुम यहां क्या करने लगे?भैया कहां हैं?'

देवीदीन ने मर्माहत होकर कहा, 'भैया को ले गए सुपरीडंट के पास, न जाने भेंट होती है कि ऊपर ही ऊपर परागराज भेज दिए जाते हैं। '

जग्गो-'दारोग़ाजी भी बडे वह हैं। कहां तो कहा था कि इतना लेंगे, कहां लेकर चल दिए!'

देवीदीन-'इसीलिए तो बैठा हूं कि आवें तो दो-दो बातें कर लूं।'

जग्गो-'हां,


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देवीदीन को यहां बैठे एक घंटा भी न हुआ था कि सहसा जग्गो आ खड़ी हुई। देवीदीन को द्वार पर बैठे देखकर बोली, 'तुम यहां क्या करने लगे?भैया कहां हैं?'

देवीदीन ने मर्माहत होकर कहा, 'भैया को ले गए सुपरीडंट के पास, न जाने भेंट होती है कि ऊपर ही ऊपर परागराज भेज दिए जाते हैं। '

जग्गो-'दारोग़ाजी भी बडे वह हैं। कहां तो कहा था कि इतना लेंगे, कहां लेकर चल दिए!'

देवीदीन-'इसीलिए तो बैठा हूं कि आवें तो दो-दो बातें कर लूं।'

जग्गो-'हां,


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