फटकारना जरूर,जो अपनी बात का नहीं, वह अपने बाप का क्या होगा। मैं तो खरी कहूंगी। मेरा क्या कर लेंगे!'
देवीदीन-'दूकान पर कौन है?'
जग्गो-'बंद कर आई हूं। अभी बेचारे ने कुछ खाया भी नहीं। सबेरे से
वैसे ही हैं। चूल्हे में जाय वह तमासाब उसी के टिकट लेने तो जाते थे। न घर
से निकलते तो काहे को यह बला सिर पड़ती।
देवीदीन-'जो उधार ही से पराग भेज दिया तो?'
जग्गो-'तो चिट्ठी तो आवेगी ही। चलकर वहीं देख आवेंगे?'
देवीदीन-'(आंखों में आंसू भरकर) सज़ा हो जायगी?
फटकारना जरूर,जो अपनी बात का नहीं, वह अपने बाप का क्या होगा। मैं तो खरी कहूंगी। मेरा क्या कर लेंगे!'
देवीदीन-'दूकान पर कौन है?'
जग्गो-'बंद कर आई हूं। अभी बेचारे ने कुछ खाया भी नहीं। सबेरे से
वैसे ही हैं। चूल्हे में जाय वह तमासाब उसी के टिकट लेने तो जाते थे। न घर
से निकलते तो काहे को यह बला सिर पड़ती।
देवीदीन-'जो उधार ही से पराग भेज दिया तो?'
जग्गो-'तो चिट्ठी तो आवेगी ही। चलकर वहीं देख आवेंगे?'
देवीदीन-'(आंखों में आंसू भरकर) सज़ा हो जायगी?