दारोग़ाजी ने विनोद करके कहा, 'कहो चौधारी, लाए रूपये?'
देवीदीन-'जब कह गया कि मैं थोड़ी देर में आता हूं, तो आपको मेरी राह देख लेनी चाहिए थी। चलिए, अपने रूपये लीजिए।'
दारोग़ा -'खोदकर निकाले होंगे?'
देवीदीन-'आपके अकबाल से हज़ार-पांच सौ अभी ऊपर ही निकल सकते हैं। ज़मीन खोदने की जरूरत नहीं पड़ी। चलो भैया, बुढिया कब से खड़ी है। मैं रूपये चुकाकर आता हूं। यह तो इसपिकटर साहब थे न? पहले इसी थाने में थे।'
दारोग़ा -'तो भाई,
दारोग़ाजी ने विनोद करके कहा, 'कहो चौधारी, लाए रूपये?'
देवीदीन-'जब कह गया कि मैं थोड़ी देर में आता हूं, तो आपको मेरी राह देख लेनी चाहिए थी। चलिए, अपने रूपये लीजिए।'
दारोग़ा -'खोदकर निकाले होंगे?'
देवीदीन-'आपके अकबाल से हज़ार-पांच सौ अभी ऊपर ही निकल सकते हैं। ज़मीन खोदने की जरूरत नहीं पड़ी। चलो भैया, बुढिया कब से खड़ी है। मैं रूपये चुकाकर आता हूं। यह तो इसपिकटर साहब थे न? पहले इसी थाने में थे।'
दारोग़ा -'तो भाई,