डालकर बैठते हैं। पुलिस के दो-एक अफसर भी साथ रहते हैं।'
'अगर कोई उस बाग़ में छिपकर बैठे, तो कैसा हो! जब उन्हें अकेले देखे, ख़त फेंक दे। वह जरूर उठा लेंगे।'
देवीदीन ने चकित होकर कहा, 'हां, हो तो सकता है, लेकिन अकेले मिलें तब तो!'
ज़रा और अंधेरा हुआ, तो जालपा ने देवीदीन को साथ लिया और रमानाथ का बंगला देखने चली। एक पत्र लिखकर जेब में रख लिया था। बार-बार देवीदीन से पूछती, अब कितनी दूर है? अच्छा! अभी इतनी ही दूर और!
डालकर बैठते हैं। पुलिस के दो-एक अफसर भी साथ रहते हैं।'
'अगर कोई उस बाग़ में छिपकर बैठे, तो कैसा हो! जब उन्हें अकेले देखे, ख़त फेंक दे। वह जरूर उठा लेंगे।'
देवीदीन ने चकित होकर कहा, 'हां, हो तो सकता है, लेकिन अकेले मिलें तब तो!'
ज़रा और अंधेरा हुआ, तो जालपा ने देवीदीन को साथ लिया और रमानाथ का बंगला देखने चली। एक पत्र लिखकर जेब में रख लिया था। बार-बार देवीदीन से पूछती, अब कितनी दूर है? अच्छा! अभी इतनी ही दूर और!