जालपा बोली,'यहां तो कोई नहीं है।'
देवीदीन ने फाटक के अंदर झांककर कहा, 'हां, शायद यह बंगला छोड़ दिया।'
'कहीं घूमने गए होंगे?'
'घूमने जाते तो द्वार पर पहरा होता। यह बंगला छोड़ दिया।'
'तो लौट चलें।'
'नहीं, ज़रा पता लगाना चाहिए, गए कहां?'
बंगले की दाहनी तरफ आमों के बाग़ में प्रकाश दिखाई दिया। शायद खटिक बाग़ की रखवाली कर रहा था। देवीदीन ने बाग में आकर पुकारा, 'कौन है यहां? किसने यह बाग़ लिया है?'
एक आदमी आमों
जालपा बोली,'यहां तो कोई नहीं है।'
देवीदीन ने फाटक के अंदर झांककर कहा, 'हां, शायद यह बंगला छोड़ दिया।'
'कहीं घूमने गए होंगे?'
'घूमने जाते तो द्वार पर पहरा होता। यह बंगला छोड़ दिया।'
'तो लौट चलें।'
'नहीं, ज़रा पता लगाना चाहिए, गए कहां?'
बंगले की दाहनी तरफ आमों के बाग़ में प्रकाश दिखाई दिया। शायद खटिक बाग़ की रखवाली कर रहा था। देवीदीन ने बाग में आकर पुकारा, 'कौन है यहां? किसने यह बाग़ लिया है?'
एक आदमी आमों