के झुरमुट से निकल आया। देवीदीन ने उसे पहचानकर कहा ,
'अरे! तुम हो जंगली? तुमने यह बाग़ लिया है?'
जगंली ठिगना-सा गठीला आदमी था, बोला,'हां दादा, ले लिया, पर कुछ है नहीं। डंड ही भरना पड़ेगा। तुम यहां कैसे आ गए?'
'कुछ नहीं, यों ही चला आया था। इस बंगले वाले आदमी क्या हुए?'
जंगली ने इधर-उधर देखकर कनबतियों में कहा, 'इसमें वही मुखबर टिका हुआ था। आज सब चले गए। सुनते हैं, पंद्रह-बीस दिन में आएंगे, जब फिर हाईकोर्ट में मुकदमा
के झुरमुट से निकल आया। देवीदीन ने उसे पहचानकर कहा ,
'अरे! तुम हो जंगली? तुमने यह बाग़ लिया है?'
जगंली ठिगना-सा गठीला आदमी था, बोला,'हां दादा, ले लिया, पर कुछ है नहीं। डंड ही भरना पड़ेगा। तुम यहां कैसे आ गए?'
'कुछ नहीं, यों ही चला आया था। इस बंगले वाले आदमी क्या हुए?'
जंगली ने इधर-उधर देखकर कनबतियों में कहा, 'इसमें वही मुखबर टिका हुआ था। आज सब चले गए। सुनते हैं, पंद्रह-बीस दिन में आएंगे, जब फिर हाईकोर्ट में मुकदमा