'कुछ मालूम हुआ मुकदमा कब पेश होगा?'
'कल ही तो।'
'कल ही! इतनी जल्द, तब तो जो कुछ करना है आज ही करना होगा। किसी तरह मेरा ख़त उन्हें मिल जाता, तो काम बन जाता।'
देवीदीन ने इस तरह ताका मानो कह रहा है, तुम इस काम को जितना आसान समझती हो उतना आसान नहीं है।
जालपा ने उसके मन का भाव ताड़कर कहा, 'क्या तुम्हें संदेह है कि वह अपना बयान बदलने पर राज़ी होंगे?'
देवीदीन को अब इसे स्वीकार करने के सिवा और कोई उपाय न सूझा, बोला,
'कुछ मालूम हुआ मुकदमा कब पेश होगा?'
'कल ही तो।'
'कल ही! इतनी जल्द, तब तो जो कुछ करना है आज ही करना होगा। किसी तरह मेरा ख़त उन्हें मिल जाता, तो काम बन जाता।'
देवीदीन ने इस तरह ताका मानो कह रहा है, तुम इस काम को जितना आसान समझती हो उतना आसान नहीं है।
जालपा ने उसके मन का भाव ताड़कर कहा, 'क्या तुम्हें संदेह है कि वह अपना बयान बदलने पर राज़ी होंगे?'
देवीदीन को अब इसे स्वीकार करने के सिवा और कोई उपाय न सूझा, बोला,