अलंकार - Alankar

फिर भी इतना शेष था कि नगर के सारे चोरचंडाल अयाची हो जाते !

इस हलचल में केवल एक वृद्ध मनुष्य स्थिरचित्त दिखाई देता था। वह थायस के हाथों दूर देशों से बहुमूल्य वस्तु लालाकर बेचता था और थायस पर उसके बहुत रुपये आते थे। वह सबकी बातें सुनता था, देखता था कि लोग क्या करते हैं। रहरहकर दा़ी पर हाथ फेरता था और मन में कुछ सोच रहा था। एकाएक उसने एक युवक को सुन्दर वस्त्र पहने पास खड़े देखा। उसने युवक से पूछा-'तुम थायस के परेमियों में नहीं हो !'


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फिर भी इतना शेष था कि नगर के सारे चोरचंडाल अयाची हो जाते !

इस हलचल में केवल एक वृद्ध मनुष्य स्थिरचित्त दिखाई देता था। वह थायस के हाथों दूर देशों से बहुमूल्य वस्तु लालाकर बेचता था और थायस पर उसके बहुत रुपये आते थे। वह सबकी बातें सुनता था, देखता था कि लोग क्या करते हैं। रहरहकर दा़ी पर हाथ फेरता था और मन में कुछ सोच रहा था। एकाएक उसने एक युवक को सुन्दर वस्त्र पहने पास खड़े देखा। उसने युवक से पूछा-'तुम थायस के परेमियों में नहीं हो !'


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