अलंकार - Alankar



इतने में एक मनुष्य भड़कीले वस्त्र पहने, जंगली फूलों की एक माला सिर पर लपेटे भीड़ को हटाता हुआ आया और चिल्लाकर बोला-'ठहरो, ठहरो, यह उत्पात क्यों मचा रहे हो ? यह योगी मेरा भाई है।'

यह निसियास था, जो वृद्ध यूत्र्कसइटीज कसे कबर में सुलाकर इस मैदान में होता हुआ घर लौटा जा रहा था। देखा तो अलाव जल रहा है, उसमें भांतिभांति की बहुमूल्य वस्तुएं पड़ी सुलग रही हैं, थायस एक मोटी चादर ओ़े खड़ी है और पापनाशी पर चारों ओर से पत्थरों


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इतने में एक मनुष्य भड़कीले वस्त्र पहने, जंगली फूलों की एक माला सिर पर लपेटे भीड़ को हटाता हुआ आया और चिल्लाकर बोला-'ठहरो, ठहरो, यह उत्पात क्यों मचा रहे हो ? यह योगी मेरा भाई है।'

यह निसियास था, जो वृद्ध यूत्र्कसइटीज कसे कबर में सुलाकर इस मैदान में होता हुआ घर लौटा जा रहा था। देखा तो अलाव जल रहा है, उसमें भांतिभांति की बहुमूल्य वस्तुएं पड़ी सुलग रही हैं, थायस एक मोटी चादर ओ़े खड़ी है और पापनाशी पर चारों ओर से पत्थरों


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