अन्तःकरण में अपने परति घृणा का भाव उत्पन्न किये न ईश्वर की परार्थना कर सकती है न वन्दना।'
धूप के मारे जमीन से आंच निकल रही थी और थायस आपने नये गुरु के पीछे सिर झुकाये पथरीली सड़कों पर चली जा रही थी। थकान के मारे उसके घुटनों में पीड़ा होने लगी और कंठ सूख गया। लेकिन पापनाशी के मन में दयाभाव का जागना तो दूर रहा, (जो दुरात्माओं को भी नर्म कर देता है) वह उलटे उस पराणी के परायश्चित पर परसन्न हो रहा था जिस के पापों का वारापार
अन्तःकरण में अपने परति घृणा का भाव उत्पन्न किये न ईश्वर की परार्थना कर सकती है न वन्दना।'
धूप के मारे जमीन से आंच निकल रही थी और थायस आपने नये गुरु के पीछे सिर झुकाये पथरीली सड़कों पर चली जा रही थी। थकान के मारे उसके घुटनों में पीड़ा होने लगी और कंठ सूख गया। लेकिन पापनाशी के मन में दयाभाव का जागना तो दूर रहा, (जो दुरात्माओं को भी नर्म कर देता है) वह उलटे उस पराणी के परायश्चित पर परसन्न हो रहा था जिस के पापों का वारापार