न था। वह धमोर्त्साह से इतना उत्तेजित हो रहा था कि उसे देह को लोहे के सांगों से छेदने में भी उसे संकोच न होता जिसका सौन्दर्य उसकी कलुषता का मानो उज्ज्वल परमाण था। ज्योंज्यों वह विचार में मग्न होता था, उसका परकोप औरभी परचण्ड होता जाता था। जब उसे याद आता था कि निसियास उसके साथ सहयोग करचुका है तो उसका रक्त खौलने लगता था और ऐसा जान पड़ता था कि उसकी छाती फट जायेगी। अपशब्द उसके होंठों पर आआकर रुक जाते थे और वह केवल दांत पीसपीसकररह जाता था। सहसा वह उछलकर,
न था। वह धमोर्त्साह से इतना उत्तेजित हो रहा था कि उसे देह को लोहे के सांगों से छेदने में भी उसे संकोच न होता जिसका सौन्दर्य उसकी कलुषता का मानो उज्ज्वल परमाण था। ज्योंज्यों वह विचार में मग्न होता था, उसका परकोप औरभी परचण्ड होता जाता था। जब उसे याद आता था कि निसियास उसके साथ सहयोग करचुका है तो उसका रक्त खौलने लगता था और ऐसा जान पड़ता था कि उसकी छाती फट जायेगी। अपशब्द उसके होंठों पर आआकर रुक जाते थे और वह केवल दांत पीसपीसकररह जाता था। सहसा वह उछलकर,