अलंकार - Alankar



वह धर्म का सेहरा सिर बांधे हुए आये हैं,

जिसने हमारा गौरव ब़ा दिया है।

क्योंकि पिता का धर्म ही,

सन्तान का यथार्थ धन है।

हमारे पिता की सुकीर्ति की ज्योति से,

हमारी कुटियों में परकाश फैल गया है।

हमारे पिता पापनाशी,

परभु मसीह के लिए नयी एक दुल्हन लाये हैं।

अपने अलौकिक तेज और सिद्धि से,

उन्होंने एक काली भेड़ को।

जो अंधेरी घाटियों से मारीमारी फिरती थी,

उजली भेड़ बना दिया है।

इस भांति ईसाई धर्म की ध्वजा फहराते हुए,


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वह धर्म का सेहरा सिर बांधे हुए आये हैं,

जिसने हमारा गौरव ब़ा दिया है।

क्योंकि पिता का धर्म ही,

सन्तान का यथार्थ धन है।

हमारे पिता की सुकीर्ति की ज्योति से,

हमारी कुटियों में परकाश फैल गया है।

हमारे पिता पापनाशी,

परभु मसीह के लिए नयी एक दुल्हन लाये हैं।

अपने अलौकिक तेज और सिद्धि से,

उन्होंने एक काली भेड़ को।

जो अंधेरी घाटियों से मारीमारी फिरती थी,

उजली भेड़ बना दिया है।

इस भांति ईसाई धर्म की ध्वजा फहराते हुए,


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