वह फिर हमारे ऊपर हाथ रखने के लिए लौट आये हैं।
उन मधुमक्खियों की भांति,
जो अपने छत्तों से उड़ जाती है।
और फिर जंगलों से फूलों की,
मधुसुधा लिये हुए लौटती हैं।
न्युबिया के मेष की भांति,
जो अपने ही ऊन का बोझ नहीं उठा सकता।
हम आज के दिन आनन्दोत्सव मनायें,
अपने भोजन में तेल को चुपड़कर।।
जब वह लोग पापनाशी की कुटी के द्वार पर आये तो सबके-सब घुटने टेककर बैठ गये और बोले-'पूज्य पिता ! हमें आशीवार्द दीजिए और
वह फिर हमारे ऊपर हाथ रखने के लिए लौट आये हैं।
उन मधुमक्खियों की भांति,
जो अपने छत्तों से उड़ जाती है।
और फिर जंगलों से फूलों की,
मधुसुधा लिये हुए लौटती हैं।
न्युबिया के मेष की भांति,
जो अपने ही ऊन का बोझ नहीं उठा सकता।
हम आज के दिन आनन्दोत्सव मनायें,
अपने भोजन में तेल को चुपड़कर।।
जब वह लोग पापनाशी की कुटी के द्वार पर आये तो सबके-सब घुटने टेककर बैठ गये और बोले-'पूज्य पिता ! हमें आशीवार्द दीजिए और