बैठा तो विचार करने लगा-अन्त में मैं अपने आनन्द और शान्ति के उद्दिष्ट स्थान पर पहुंच गया। मैं अपने सन्टोष से सुरक्षित ग़ में परविष्ट हो गया, लेकिन यह क्या बात है कि यह तिनकों का झोंपड़ा जो मुझे इतना पिरय है, मुझे मित्रभाव से नहीं देखता और दीवारें मुझसे हर्षित होकर नहीं कहतीं-'तेरा आना मुबारक हो !' मेरी अनुपस्थिति में यहां किसी परकार का अन्तर होता हुआ नहीं दीख पड़ता। झोंपड़ा ज्योंका-त्यों है, यही पुरानी मेज और मेरी पुरानी खाट है। वह मसालों से भरा सिर है,
बैठा तो विचार करने लगा-अन्त में मैं अपने आनन्द और शान्ति के उद्दिष्ट स्थान पर पहुंच गया। मैं अपने सन्टोष से सुरक्षित ग़ में परविष्ट हो गया, लेकिन यह क्या बात है कि यह तिनकों का झोंपड़ा जो मुझे इतना पिरय है, मुझे मित्रभाव से नहीं देखता और दीवारें मुझसे हर्षित होकर नहीं कहतीं-'तेरा आना मुबारक हो !' मेरी अनुपस्थिति में यहां किसी परकार का अन्तर होता हुआ नहीं दीख पड़ता। झोंपड़ा ज्योंका-त्यों है, यही पुरानी मेज और मेरी पुरानी खाट है। वह मसालों से भरा सिर है,