का अनुभव हुआ। एक छोटासा गीदड़ उसकी चारपाई की पट्टी पर दोनों अगले पैर रखे हांफहांफकर अपनी दुर्गन्धयुक्त सांसें उसके मुख पर छोड़ रहा था, और उसे दांत निकालनिकालकर दिखा रहा था।
पापनाशी को अत्यन्त विस्मय हुआ। उसे ऐसा जान पड़ा, मेरे पैरों के नीचे की जमीन धंस गयी। और वास्तव में वह पतित हो गया था। कुछ देर तक तो उसमें विचार करने की शक्ति ही न रही और जब वह फिर सचेत भी हुआ तो ध्यान और विचार से उसकी अशान्ति और भी ब़ गई।
उसने
का अनुभव हुआ। एक छोटासा गीदड़ उसकी चारपाई की पट्टी पर दोनों अगले पैर रखे हांफहांफकर अपनी दुर्गन्धयुक्त सांसें उसके मुख पर छोड़ रहा था, और उसे दांत निकालनिकालकर दिखा रहा था।
पापनाशी को अत्यन्त विस्मय हुआ। उसे ऐसा जान पड़ा, मेरे पैरों के नीचे की जमीन धंस गयी। और वास्तव में वह पतित हो गया था। कुछ देर तक तो उसमें विचार करने की शक्ति ही न रही और जब वह फिर सचेत भी हुआ तो ध्यान और विचार से उसकी अशान्ति और भी ब़ गई।
उसने