दुर्भावनाएं ही उसे व्यथित करने लगें ? मैं क्यों ऐसे लक्षणों का स्पष्टीकरण नहीं कर देता जिसके द्वारा मुझे मालूम हो जाया करे कि तेरी इच्छा क्या है, और क्यों तेरे परतिपक्षी की ?
किन्तु ईश्वर ने, जिसकी माया अभेद्य है, अपने इस भक्त की इच्छा पूरी न की ओर उसे आत्मज्ञान न परदान किया तो उसने शंका और भरांति वशीभूत होकर निश्चय किया अब मैं थायस की ओर मन को जाने ही न दूंगा। लेकिन उसका यह परयत्न निष्फल हुआ। उससे दूर रहकर भी थायस नितय उसके साथ रहती थी। जब वह कुछ पॄता था,
दुर्भावनाएं ही उसे व्यथित करने लगें ? मैं क्यों ऐसे लक्षणों का स्पष्टीकरण नहीं कर देता जिसके द्वारा मुझे मालूम हो जाया करे कि तेरी इच्छा क्या है, और क्यों तेरे परतिपक्षी की ?
किन्तु ईश्वर ने, जिसकी माया अभेद्य है, अपने इस भक्त की इच्छा पूरी न की ओर उसे आत्मज्ञान न परदान किया तो उसने शंका और भरांति वशीभूत होकर निश्चय किया अब मैं थायस की ओर मन को जाने ही न दूंगा। लेकिन उसका यह परयत्न निष्फल हुआ। उससे दूर रहकर भी थायस नितय उसके साथ रहती थी। जब वह कुछ पॄता था,