अलंकार - Alankar

वह स्थिर और सुदीर्घ होती है। इसके परतिकूल एकान्त में जो छाया उपस्थित होती है, वह स्थिर और सुदीर्घ होती है। वह नाना परकार के रूप बदलकर उसके सामने आती-कभी मलिनवदन केशों में अपनी अन्तिम पुष्पमाला गूंथे, वही सुनहरे काम के वस्त्र धारण किये जो उसने इस्कन्द्रिया में कोटा के परीतिभोज के अवसर पर पहने थे, कभी महीन वस्त्र पहने परियों के कुंज में बैठी हुई, कभी मोटा कुरता पहने, विरक्त और आध्यात्मिक आनन्द से विकसित, कभी शोक में डूबी आंखें मृत्यु की भयंकर आशंकाओं से डबडबाई हुई,


504 of 707

वह स्थिर और सुदीर्घ होती है। इसके परतिकूल एकान्त में जो छाया उपस्थित होती है, वह स्थिर और सुदीर्घ होती है। वह नाना परकार के रूप बदलकर उसके सामने आती-कभी मलिनवदन केशों में अपनी अन्तिम पुष्पमाला गूंथे, वही सुनहरे काम के वस्त्र धारण किये जो उसने इस्कन्द्रिया में कोटा के परीतिभोज के अवसर पर पहने थे, कभी महीन वस्त्र पहने परियों के कुंज में बैठी हुई, कभी मोटा कुरता पहने, विरक्त और आध्यात्मिक आनन्द से विकसित, कभी शोक में डूबी आंखें मृत्यु की भयंकर आशंकाओं से डबडबाई हुई,


504 of 707