अलंकार - Alankar

अपना आवरणहीन हृदयस्थल खोले, जिस पर आहतहृदय से रक्तधारा परवाहित होकर जम गयी थी। इन छायामूर्तियों में उसे जिस बात का सबसे अधिक खेद और विस्मय होता था वह यह थी कि वह पुष्पमालाएं, वह सुन्दर वस्त्र, वह महीन चादरें, वह जरी के काम की कुर्तियां जो उसने जला डाली थीं, फिर जैसे लौट आयीं। उसे अब यह विदित होता था कि इन वस्तुओं में भी कोई अविनाशी आत्मा है और उसने अन्तवेर्दना से विकल होकर कहा-

'कैसी विपत्ति है कि थायस के असंख्य पापों की आत्माएं यों मुझ पर आत्र्कमण कर रही हैं।'


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अपना आवरणहीन हृदयस्थल खोले, जिस पर आहतहृदय से रक्तधारा परवाहित होकर जम गयी थी। इन छायामूर्तियों में उसे जिस बात का सबसे अधिक खेद और विस्मय होता था वह यह थी कि वह पुष्पमालाएं, वह सुन्दर वस्त्र, वह महीन चादरें, वह जरी के काम की कुर्तियां जो उसने जला डाली थीं, फिर जैसे लौट आयीं। उसे अब यह विदित होता था कि इन वस्तुओं में भी कोई अविनाशी आत्मा है और उसने अन्तवेर्दना से विकल होकर कहा-

'कैसी विपत्ति है कि थायस के असंख्य पापों की आत्माएं यों मुझ पर आत्र्कमण कर रही हैं।'


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