अलंकार - Alankar

कर्मों का दण्ड दिया जाये जो मैंने तेरा माहात्म्य ब़ाने के निमित्त किये हैं ? प्यारे मसीह, आप इस घोर अन्याय से मेरी रक्षा कीजिए। मेरे त्राता, मुझे बचाइए। देह मुझ पर जो विजय पराप्त न कर सकी, वह विजयकीर्ति उसकी छाया को न परदान कीजिए। मैं जानता हूं कि मैं इस समय महासंकटों में पड़ा हुआ हूं। मेरा जीवन इतना शंकामय कभी न था। मैं जानता हूं और अनुभव करता हूं कि स्वप्न में परत्यक्ष से अधिक शक्ति है और यह कोई आश्चर्य की बात नहीं,


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कर्मों का दण्ड दिया जाये जो मैंने तेरा माहात्म्य ब़ाने के निमित्त किये हैं ? प्यारे मसीह, आप इस घोर अन्याय से मेरी रक्षा कीजिए। मेरे त्राता, मुझे बचाइए। देह मुझ पर जो विजय पराप्त न कर सकी, वह विजयकीर्ति उसकी छाया को न परदान कीजिए। मैं जानता हूं कि मैं इस समय महासंकटों में पड़ा हुआ हूं। मेरा जीवन इतना शंकामय कभी न था। मैं जानता हूं और अनुभव करता हूं कि स्वप्न में परत्यक्ष से अधिक शक्ति है और यह कोई आश्चर्य की बात नहीं,


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