जो एक ही क्षण में अत्याधिक ताप से शीत में आ पहुंचे। उसे तुरन्त खांसी और ज्वर घेर लेते हैं। बन्धु, तुम्हारे लिए मेरी यह सलाह है कि किसी निर्जन मरुस्थल में जाने के बदले, मनबहलाव के ऐसे काम करो जो तपस्वियों और साधुओं के सर्वथा योग्य हैं। तुम्हारी जगह मैं होता तो समीपवर्ती धमार्श्रमों की सैर करता। इनमें से कई देखने के योग्य हैं, लोग उनकी बड़ी परशंसा करते हैं। सिरैपियन के ऋषिगृह में एक हजार चार सौ बत्तीस कुटियां बनी हुई हैं,
जो एक ही क्षण में अत्याधिक ताप से शीत में आ पहुंचे। उसे तुरन्त खांसी और ज्वर घेर लेते हैं। बन्धु, तुम्हारे लिए मेरी यह सलाह है कि किसी निर्जन मरुस्थल में जाने के बदले, मनबहलाव के ऐसे काम करो जो तपस्वियों और साधुओं के सर्वथा योग्य हैं। तुम्हारी जगह मैं होता तो समीपवर्ती धमार्श्रमों की सैर करता। इनमें से कई देखने के योग्य हैं, लोग उनकी बड़ी परशंसा करते हैं। सिरैपियन के ऋषिगृह में एक हजार चार सौ बत्तीस कुटियां बनी हुई हैं,