और तपस्वियों को उतने वर्गों में विभक्त किया गया है जितने अक्षर यूनानी लिपि में हैं। मुझसे लोगों ने यह भी कहा है कि इस वगीर्करण में अक्षर, आकार और साधकों की मनोवृत्तियों में एक परकार की अनुरूपता का ध्यान रखा जाता है। उदाहरणतः वह लोग जो र वर्ग के अन्तर्गत रखे जाते हैं चंचल परकृति के होते हैं, और जो लोग शान्तपरकृति के हैं वह प के अन्तर्गत रखे जाते हैं। बन्धुवर, तुम्हारी जगह मैं होता तो अपनी आंखों से इस रहस्य को देखता और जब तक ऐसे अद्भुत स्थान की सैर न कर लेता,
और तपस्वियों को उतने वर्गों में विभक्त किया गया है जितने अक्षर यूनानी लिपि में हैं। मुझसे लोगों ने यह भी कहा है कि इस वगीर्करण में अक्षर, आकार और साधकों की मनोवृत्तियों में एक परकार की अनुरूपता का ध्यान रखा जाता है। उदाहरणतः वह लोग जो र वर्ग के अन्तर्गत रखे जाते हैं चंचल परकृति के होते हैं, और जो लोग शान्तपरकृति के हैं वह प के अन्तर्गत रखे जाते हैं। बन्धुवर, तुम्हारी जगह मैं होता तो अपनी आंखों से इस रहस्य को देखता और जब तक ऐसे अद्भुत स्थान की सैर न कर लेता,