अलंकार - Alankar

मैं नहीं लिख सकता क्योंकि मेरे हाथ फावड़ा चलातेचलाते इतने कठोर हो गये हैं कि उनमें पतली कलम को भोजपत्र पर चलाने की क्षमता ही नहीं रही। लिखने के लिए हाथों का कोमल होना जरूरी है। लेकिन बन्धुवर, तुम तो लिखने में चतुर हो, और तुम्हें ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए कि उसने तुम्हें यह विद्या परदान की, क्योंकि सुन्दर लिपियों की जितनी परशंसा की जाये थोड़ी है। गरन्थों की नकल करना और पॄना बुरे विचारों से बचने का बहुत ही उत्तम साधन हैं। बन्धु पापनाशी,


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मैं नहीं लिख सकता क्योंकि मेरे हाथ फावड़ा चलातेचलाते इतने कठोर हो गये हैं कि उनमें पतली कलम को भोजपत्र पर चलाने की क्षमता ही नहीं रही। लिखने के लिए हाथों का कोमल होना जरूरी है। लेकिन बन्धुवर, तुम तो लिखने में चतुर हो, और तुम्हें ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए कि उसने तुम्हें यह विद्या परदान की, क्योंकि सुन्दर लिपियों की जितनी परशंसा की जाये थोड़ी है। गरन्थों की नकल करना और पॄना बुरे विचारों से बचने का बहुत ही उत्तम साधन हैं। बन्धु पापनाशी,


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