तुम हमारे श्रद्धेय ऋषियों, पालम और एन्तोनी के सदुपदेशों को लिपिबद्ध क्यों नहीं कर डालते ? ऐसे धार्मिक कामों में लगे रहने से शनै:शैनः तुम चित्त और आत्मा की शांति को पुनः लाभ कर लोगे, फिर एकांत तुम्हें सुखद जान पड़ेगा और शीघर ही तुम इस योग्य हो जाओगे कि आत्मशुद्धि की उन त्रि्कयाओं में परवृत्त हो जाओगे जिनमें तुम्हारी यात्रा ने विघ्न डाल दिया था। लेकिन कठिन कष्टों और दमनकारी वेदनाओं के सहन से तुम्हें बहुत आशा न रखनी चाहिए।
तुम हमारे श्रद्धेय ऋषियों, पालम और एन्तोनी के सदुपदेशों को लिपिबद्ध क्यों नहीं कर डालते ? ऐसे धार्मिक कामों में लगे रहने से शनै:शैनः तुम चित्त और आत्मा की शांति को पुनः लाभ कर लोगे, फिर एकांत तुम्हें सुखद जान पड़ेगा और शीघर ही तुम इस योग्य हो जाओगे कि आत्मशुद्धि की उन त्रि्कयाओं में परवृत्त हो जाओगे जिनमें तुम्हारी यात्रा ने विघ्न डाल दिया था। लेकिन कठिन कष्टों और दमनकारी वेदनाओं के सहन से तुम्हें बहुत आशा न रखनी चाहिए।