रंगभूमि - Rangbhumi


माँ-तू प्रभु मसीह को अपना मुक्तिदाता समझती है? तुझे यह विश्वास है कि वही तेरा उध्दार करेंगे?

सोफ़िया-कदापि नहीं। मेरा विश्वास है कि मेरी मुक्ति, अगर मुक्ति हो सकती है, तो मेरे कर्मों से होगी।

माँ-तेरे कर्मों से तेरे मुँह में कालिख लगेगी, मुक्ति न होगी।

यह कहकर मिसेज़ सेवक फिटन पर जा बैठीं। संध्‍या हो गई थी। सड़क पर ईसाइयों के दल-के-दल कोई ओवरकोट पहने, कोई माघ की ठंड से सिकुड़े हुए, खुश गिरजे चले जा रहे थे, पर सोफ़िया


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माँ-तू प्रभु मसीह को अपना मुक्तिदाता समझती है? तुझे यह विश्वास है कि वही तेरा उध्दार करेंगे?

सोफ़िया-कदापि नहीं। मेरा विश्वास है कि मेरी मुक्ति, अगर मुक्ति हो सकती है, तो मेरे कर्मों से होगी।

माँ-तेरे कर्मों से तेरे मुँह में कालिख लगेगी, मुक्ति न होगी।

यह कहकर मिसेज़ सेवक फिटन पर जा बैठीं। संध्‍या हो गई थी। सड़क पर ईसाइयों के दल-के-दल कोई ओवरकोट पहने, कोई माघ की ठंड से सिकुड़े हुए, खुश गिरजे चले जा रहे थे, पर सोफ़िया


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