रंगभूमि - Rangbhumi

चल दिए थे। जॉन सेवक ने आकर केवल इतना पूछा-क्या बहुत ज्यादा दर्द है? मैं उधार से कोई दवा लेता आऊँगा, जरा पढ़ना कम कर दो और रोज घूमने जाया करो।

यह कहकर वह प्रभु सेवक के साथ फ़िटन पर आ बैठे। लेकिन मिसेज़ सेवक इतनी आसानी से उसका गला छोड़ने वाली न थीं। बोलीं-तुझे ईसू के नाम से इतनी घृणा है?

सोफ़िया-मैं हृदय से उनकी श्रध्दा करती हूँ।

माँ-तू झूठ बोलती है।

सोफ़िया-अगर दिल में श्रध्दा न होती, तो जबान से कदापि न कहती।


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चल दिए थे। जॉन सेवक ने आकर केवल इतना पूछा-क्या बहुत ज्यादा दर्द है? मैं उधार से कोई दवा लेता आऊँगा, जरा पढ़ना कम कर दो और रोज घूमने जाया करो।

यह कहकर वह प्रभु सेवक के साथ फ़िटन पर आ बैठे। लेकिन मिसेज़ सेवक इतनी आसानी से उसका गला छोड़ने वाली न थीं। बोलीं-तुझे ईसू के नाम से इतनी घृणा है?

सोफ़िया-मैं हृदय से उनकी श्रध्दा करती हूँ।

माँ-तू झूठ बोलती है।

सोफ़िया-अगर दिल में श्रध्दा न होती, तो जबान से कदापि न कहती।


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