की रचना स्मृतियों की पुनरावृत्ति-मात्रा होती है।
सोफ़िया ने क्षीण स्वर में पूछा-मैं कहाँ हूँ? मामा कहाँ हैं?
वृध्द पुरुष ने कहा-तुम कुँवर भरतसिंह के घर में हो। तुम्हारे सामने रानी साहबा बैठी हुई हैं, तुम्हारा जी अब कैसा है?
सोफ़िया-अच्छी हूँ, प्यास लगी है। मामा कहाँ हैं, पापा कहाँ हैं, आप कौन हैं?
रानी-यह डॉक्टर गांगुली हैं, तीन दिन से तुम्हारी दवा कर रहे हैं। तुम्हारे पापा-मामा कौन हैं?
सोफ़िया-पापा का नाम मि. जॉन सेवक है। हमारा बँगला सिगरा में है।
की रचना स्मृतियों की पुनरावृत्ति-मात्रा होती है।
सोफ़िया ने क्षीण स्वर में पूछा-मैं कहाँ हूँ? मामा कहाँ हैं?
वृध्द पुरुष ने कहा-तुम कुँवर भरतसिंह के घर में हो। तुम्हारे सामने रानी साहबा बैठी हुई हैं, तुम्हारा जी अब कैसा है?
सोफ़िया-अच्छी हूँ, प्यास लगी है। मामा कहाँ हैं, पापा कहाँ हैं, आप कौन हैं?
रानी-यह डॉक्टर गांगुली हैं, तीन दिन से तुम्हारी दवा कर रहे हैं। तुम्हारे पापा-मामा कौन हैं?
सोफ़िया-पापा का नाम मि. जॉन सेवक है। हमारा बँगला सिगरा में है।