नहीं हो सकती। तुम मेरे कुल की रक्षा करनेवाली देवी हो।
सोफ़िया-जिस घर में आग लगी थी, उसके आदमी सब बच गए?
रानी-बेटी, यह तो केवल अभिनय था, विनय ने यहाँ एक सेवा-समिति बना रखी है! जब शहर में कोई मेला होता है, या कहीं से किसी दुर्घटना का समाचार आता है, तो समिति वहाँ पहुँचकर सेवा-सहायता करती है। उस दिन समिति की परीक्षा के लिए कुँवर साहब ने वह अभिनय किया था।
डॉक्टर-कुँवर साहब देवता है, कितने गरीब लागों की रक्षा करता है। यह समिति,
नहीं हो सकती। तुम मेरे कुल की रक्षा करनेवाली देवी हो।
सोफ़िया-जिस घर में आग लगी थी, उसके आदमी सब बच गए?
रानी-बेटी, यह तो केवल अभिनय था, विनय ने यहाँ एक सेवा-समिति बना रखी है! जब शहर में कोई मेला होता है, या कहीं से किसी दुर्घटना का समाचार आता है, तो समिति वहाँ पहुँचकर सेवा-सहायता करती है। उस दिन समिति की परीक्षा के लिए कुँवर साहब ने वह अभिनय किया था।
डॉक्टर-कुँवर साहब देवता है, कितने गरीब लागों की रक्षा करता है। यह समिति,