रंगभूमि - Rangbhumi

को देखते हुए आप लाभ के अनुमान में कुछ और कमी कर सकते हैं।

कुँवर साहब-आखिर कहाँ तक?

जॉन सेवक-20 रुपये सैकड़े समझिए।

कुँवर साहब-और पहले वर्ष?

जॉन सेवक-कम-से-कम 15 रुपये प्रति सैकड़े।

कुँवर साहब-मैं पहले वर्ष 10 रुपये और उसके बाद 15 रुपये प्रति सैकड़े पर संतुष्ट हो जाऊँगा।

जॉन सेवक-तो फिर मैं आपसे यही कहूँगा कि हिस्से लेने में विलम्ब न करें। खुदा ने चाहा, तो आपको कभी निराशा न होगी।

सौ-सौ रुपये के हिस्से थे।


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को देखते हुए आप लाभ के अनुमान में कुछ और कमी कर सकते हैं।

कुँवर साहब-आखिर कहाँ तक?

जॉन सेवक-20 रुपये सैकड़े समझिए।

कुँवर साहब-और पहले वर्ष?

जॉन सेवक-कम-से-कम 15 रुपये प्रति सैकड़े।

कुँवर साहब-मैं पहले वर्ष 10 रुपये और उसके बाद 15 रुपये प्रति सैकड़े पर संतुष्ट हो जाऊँगा।

जॉन सेवक-तो फिर मैं आपसे यही कहूँगा कि हिस्से लेने में विलम्ब न करें। खुदा ने चाहा, तो आपको कभी निराशा न होगी।

सौ-सौ रुपये के हिस्से थे।


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