रंगभूमि - Rangbhumi

उत्तर दूँगा। बिना सोचे-समझे इतना कठिन व्रत क्योंकर धारण कर लेता।

जॉन सेवक-मगर सोचने-समझने में महीनों न लगा देना। दो-चार दिन में आकर नाम लिखा लेना। तब तुम्हें उनसे कुछ काम की बातें करने का अधिकार हो जाएगा। (स्त्री से) तुम्हारी रानीजी से कैसी निभी?

मिसेज़ सेवक-मुझे तो उनसे घृणा हो गई। मैंने किसी में इतना घमंड नहीं देखा।

प्रभु सेवक-मामा, आप उनके साथ घोर अन्याय कर रही हैं।

मिसेज़ सेवक-तुम्हारे लिए देवी होंगी, मेरे लिए तो नहीं हैं।


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उत्तर दूँगा। बिना सोचे-समझे इतना कठिन व्रत क्योंकर धारण कर लेता।

जॉन सेवक-मगर सोचने-समझने में महीनों न लगा देना। दो-चार दिन में आकर नाम लिखा लेना। तब तुम्हें उनसे कुछ काम की बातें करने का अधिकार हो जाएगा। (स्त्री से) तुम्हारी रानीजी से कैसी निभी?

मिसेज़ सेवक-मुझे तो उनसे घृणा हो गई। मैंने किसी में इतना घमंड नहीं देखा।

प्रभु सेवक-मामा, आप उनके साथ घोर अन्याय कर रही हैं।

मिसेज़ सेवक-तुम्हारे लिए देवी होंगी, मेरे लिए तो नहीं हैं।


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