रंगभूमि - Rangbhumi



रकिया-जान-जोखिम तो है ही, ये गँवार किसी के नहीं होते।

ताहिर-क्या आपने भी कुछ अफवाह सुनी है?

रकिया-हाँ, ये सब चमार आपस में बातें करते जा रहे थे कि साहब ने जमीन ली, तो खून की नदी बह जाएगी। मैंने तो जब से सुना है, होश उड़े जा रहे हैं।

जैनब-होश उड़ने की बात ही है।

ताहिर-मुझे सब नाहक बदनाम कर रहे हैं। मैं लेने में, न देने में। साहब ने उस अंधे से जमीन की निस्बत बातचीत करने का हुक्म दिया था। मैंने हुक्म की तामील की,


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रकिया-जान-जोखिम तो है ही, ये गँवार किसी के नहीं होते।

ताहिर-क्या आपने भी कुछ अफवाह सुनी है?

रकिया-हाँ, ये सब चमार आपस में बातें करते जा रहे थे कि साहब ने जमीन ली, तो खून की नदी बह जाएगी। मैंने तो जब से सुना है, होश उड़े जा रहे हैं।

जैनब-होश उड़ने की बात ही है।

ताहिर-मुझे सब नाहक बदनाम कर रहे हैं। मैं लेने में, न देने में। साहब ने उस अंधे से जमीन की निस्बत बातचीत करने का हुक्म दिया था। मैंने हुक्म की तामील की,


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