रंगभूमि - Rangbhumi

जो मेरा फर्ज था; लेकिन ये अहमक यही समझ रहे हैं कि मैंने ही साहब को इस जमीन की खरीदारी पर आमादा किया है; हालाँकि खुदा जानता है, मैंने कभी उनसे इसका जिक्र ही नहीं किया।

जैनब-मुझे बदनामी का खौफ तो नहीं है; हाँ, खुदा के कहर से डरती हूँ। बेकसों की आह क्यों सिर पर लो?

ताहिर-मेरे ऊपर क्यों अजाब पड़ने लगा?

जैनब-और किसके ऊपर पड़ेगा बेटा? यहाँ तो तुम्हीं हो, साहब तो नहीं बैठे हैं। वह तो भुस में आग लगाकर दूर से तमाशा देखेंगे,


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जो मेरा फर्ज था; लेकिन ये अहमक यही समझ रहे हैं कि मैंने ही साहब को इस जमीन की खरीदारी पर आमादा किया है; हालाँकि खुदा जानता है, मैंने कभी उनसे इसका जिक्र ही नहीं किया।

जैनब-मुझे बदनामी का खौफ तो नहीं है; हाँ, खुदा के कहर से डरती हूँ। बेकसों की आह क्यों सिर पर लो?

ताहिर-मेरे ऊपर क्यों अजाब पड़ने लगा?

जैनब-और किसके ऊपर पड़ेगा बेटा? यहाँ तो तुम्हीं हो, साहब तो नहीं बैठे हैं। वह तो भुस में आग लगाकर दूर से तमाशा देखेंगे,


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