रंगभूमि - Rangbhumi

अनुपम सौंदर्य है! दोनों अपनी-अपनी जगह खड़े रहे! आखिर विनय को एक उक्ति सूझी। प्रभु सेवक की ओर देखकर बोले-हम और तुम वादी हैं, खड़े रह सकते हैं, पर न्यायाधाीश का तो उच्च स्थान पर बैठना ही उचित है।

सोफी ने प्रभु सेवक की ओर ताकते हुए उत्तर दिया-खेल में बालक अपने को भूल नहीं जाता।

अंत में तीनों प्राणी कम्बल पर बैठे। प्रभु सेवक ने अपनी कविता पढ़ सुनाई। कविता माधुर्य में डूबी हुई, उच्च और पवित्र भावों से परिपूर्ण थी। कवि


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अनुपम सौंदर्य है! दोनों अपनी-अपनी जगह खड़े रहे! आखिर विनय को एक उक्ति सूझी। प्रभु सेवक की ओर देखकर बोले-हम और तुम वादी हैं, खड़े रह सकते हैं, पर न्यायाधाीश का तो उच्च स्थान पर बैठना ही उचित है।

सोफी ने प्रभु सेवक की ओर ताकते हुए उत्तर दिया-खेल में बालक अपने को भूल नहीं जाता।

अंत में तीनों प्राणी कम्बल पर बैठे। प्रभु सेवक ने अपनी कविता पढ़ सुनाई। कविता माधुर्य में डूबी हुई, उच्च और पवित्र भावों से परिपूर्ण थी। कवि


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