सिर्फ 18 रुपये बचेंगे! अभी तो पूरा महीना पड़ा हुआ है। क्या फाके करेंगे?
कुल्सूम-जब देखो, माहिर की फीस का तकाजा सिर पर सवार रहता है। अभी दस दिन हुए, फीस दी नहीं गई?
ताहिर-दस दिन नहीं हुए, एक महीना हो गया।
कुल्सूम-फीस अबकी न दी जाएगी। डॉक्टर की फीस उनकी फीस से जरूरी है। वह पढ़कर रुपये कमाएँगे, तो मेरे घर न भरेंगे। मुझे तो तुम्हारी ही जान का भरोसा है।
ताहिर-(बात बदलकर) इन मुजियों की जब तक अच्छी तरह तंबीह न हो जाएगी, शरारत से बाज न आएँगे।
सिर्फ 18 रुपये बचेंगे! अभी तो पूरा महीना पड़ा हुआ है। क्या फाके करेंगे?
कुल्सूम-जब देखो, माहिर की फीस का तकाजा सिर पर सवार रहता है। अभी दस दिन हुए, फीस दी नहीं गई?
ताहिर-दस दिन नहीं हुए, एक महीना हो गया।
कुल्सूम-फीस अबकी न दी जाएगी। डॉक्टर की फीस उनकी फीस से जरूरी है। वह पढ़कर रुपये कमाएँगे, तो मेरे घर न भरेंगे। मुझे तो तुम्हारी ही जान का भरोसा है।
ताहिर-(बात बदलकर) इन मुजियों की जब तक अच्छी तरह तंबीह न हो जाएगी, शरारत से बाज न आएँगे।