वेदना हुई। 'आह-आह' करके चिल्ला उठे। माथे पर पसीना आ गया। कुल्सूम घबराकर बोली-किसी को भेजकर डॉक्टर को क्यों नहीं बुला लेते? कहीं हड़डी पर जरब न आ गया हो।
ताहिर-हाँ, मुझे भी ऐसा ही खौफ होता है, मगर डॉक्टर को बुलाऊँ तो उसकी फीस के रुपये कहाँ से आवेंगे?
कुल्सूम-तनख्वाह तो अभी मिली थी, क्या इतनी जल्द खर्च हो गई?
ताहिर-खर्च तो नहीं हो गई, लेकिन फीस की गुंजाइश नहीं है। अबकी माहिर की तीन महीने की फीस देनी होगी। 12 रुपये तो फीस ही के निकल जाएँगे,
वेदना हुई। 'आह-आह' करके चिल्ला उठे। माथे पर पसीना आ गया। कुल्सूम घबराकर बोली-किसी को भेजकर डॉक्टर को क्यों नहीं बुला लेते? कहीं हड़डी पर जरब न आ गया हो।
ताहिर-हाँ, मुझे भी ऐसा ही खौफ होता है, मगर डॉक्टर को बुलाऊँ तो उसकी फीस के रुपये कहाँ से आवेंगे?
कुल्सूम-तनख्वाह तो अभी मिली थी, क्या इतनी जल्द खर्च हो गई?
ताहिर-खर्च तो नहीं हो गई, लेकिन फीस की गुंजाइश नहीं है। अबकी माहिर की तीन महीने की फीस देनी होगी। 12 रुपये तो फीस ही के निकल जाएँगे,